मकड़ाई रियासत की धरोहर हो रही खंडहर
- शासन-प्रशासन का रवैया उदासीन
- केबिनेट मंत्री के गृह ग्राम का मामला
लोमेश कुमार गौर
हरदा। सतपुड़ा की सौम्य पहाड़ियों पर बसे मकड़ाई रियासत की बची एक मात्र धरोहर, तत्कालीन कचहरी के नाम से विख्यात इमारत वर्तमान में आदिवासी बालक छात्रावास एवं स्कूल के उपयोग में तो आ रही है। किंतु इसके रखरखाव और मरम्मत पर यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो अन्य इमारतों की तरह जल्द ही यह भी खंडहरों की श्रंखला में तब्दील हो जाएगी।
मुख्य मार्ग से मकड़ाई में प्रवेश करते ही सामने स्थित यह इमारत आज भी अपनी पूर्ण भव्यता लिए आने वाले मेहमानों का स्वागत करते हुए दिखाई देती है। किंतु इसकी छत पर रखे खपरे जगह-जगह से टूट चुके है। कई जगह से मुंडेरे खाली हो चुकी है। जिससे बारिश के पानी से अंदर लगी बल्लियों को नुकसान पहुंचने लगा है।
सड़ चुकी है बहूमुल्य सागौन
मकड़ाई किले पर रियासत के समय बनी हुई सभी इमारतें ध्वस्त हो चुकी है। जिनमें लगी बहूमुल्य सागौन की लकड़ी शासन की उपेक्षा का शिकार होकर अपना अस्तित्व खो चुकी है। पुराना अस्पताल, डाकघर, शिक्षकों के बंगले, कोतवाली के खंडहर स्वत: ही अपनी कहानी बयां करते दिखाई देते है। कभी वे भी आगंतुकों को गर्व से सीना तानकर अपनी महत्ता बताते थे। किंतु आज अपनी बर्बादी पर आंसू बहा रहे है।
मिट चुका है किले का अस्तित्व
लगभग 27-28 वर्ष पहले मकड़ाई के महल मंे लगी भीषण आग में यहां बनी एक विश्ााल एवं भव्य इमारत को नेस्तनाबूद कर दिया था। वरना आज भी यहां पर्यटकों की भीड़ देखी जा सकती थी। लगभग 30 वर्ष पहले यहां के महाराज टोडरशाह अपने परिवार के साथ निवास करते थे। तब यहां शाही अंदाज दिखाई देता था। राजसी सत्ता का शासन में विलीन हो जाने के बाद भी वे एक राजा के भांति अपनी प्रजा का ख्याल रखते थे। खुशहाली में यहां के लोग जीवन यापन करते थे
प्रकृति ने दिया दूसरा रुप
सोने की चिड़िया कहलाने वाला भारत देश प्राकृतिक सुंदरता की भी आभा लिए हुए है। अपने तीनों और समुद्र को समेटे सिर पर हिमालय का ताज पहने खड़ा है। ऐसा ही भारत का दूसरा रुप प्रकृति ने मकड़ाई को दिया है। जिसे तीनों दिशाओं से सयानी नदी ने घेरा हुआ है। एक दिशा से पहाड़ी दरख्तों से घिरा मकड़ाई आज भी अपनी प्राचीन स्थिति को पाने की बांट जोहता दिखाई दे रहा है। यदि औद्योगिक दृष्टि अथवा पर्यटन की दृष्टि से इस ओर ध्यान दिया जाए तो मकड़ाई दोबारा अपना अस्तित्व प्राप्त कर सकता है।
लोगों को अपेक्षा है कि मकड़ाई को पर्यटक स्थल घोषित कर दिया जाए तो जिले में विकास की गति को बल मिल सकता है। प्रदेश सरकार में काबिना मंत्री विजय शाह और टिमरनी विधायक संजय शाह का गृह ग्राम मकड़ाई होने से लोगों को कुछ ज्यादा ही अपेक्षा है। लोगों का कहना है कि दोनों भाईयों को मिलकर इस धरोहर को सहेजने के लिए प्रयास करना चाहिए।
इनका कहना
जनता का सहयोग मिले तो तेली की सराय की तरह मकड़ाई को संवारा जा सकता है। जनता को आगे आना चाहिए।
- संतोष वर्मा, संयुक्त कलेक्टर, हरदा।
मकड़ाई को पर्यटन स्थल घोषित करवाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं।
- संजय शाह, विधायक टिमरनी

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